छठ पूजा बिहार
महापर्व छठ · कार्तिक शुक्ल षष्ठी

छठ पूजा क्या है? क्यों मनाते हैं छठ

जहाँ डूबते सूरज को भी प्रणाम किया जाता है

महापर्व छठ 2026 में केवल 53 दिन शेष

छठ है क्या?

छठ सूर्य देव और छठी मईया की उपासना का चार दिवसीय लोकपर्व है। यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है — 'छठ' शब्द षष्ठी से ही बना है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई से लेकर देश-विदेश में बसे प्रवासी परिवारों तक, यह आस्था का बड़ा संगम है।

चार दिन
~36 घंटे का निर्जला व्रत
दो अर्घ्य — डूबते और उगते सूर्य को
वर्ष में दो बार — कार्तिक और चैत्र
अन्य नाम: छठ छठी डाला छठ सूर्य षष्ठी

कथाएँ

सदियों पुरानी आस्था की अमर गाथाएँ — मान्यता, त्याग और सूर्य-उपासना का संबल।

राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी देवसेना
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मान्यता · लोककथा

प्रियव्रत, मालिनी और देवसेना (ब्रह्मवैवर्त पुराण)

स्वयंभुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत निःसंतान थे। महर्षि कश्यप की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ हुआ, पर रानी मालिनी ने मृत शिशु को जन्म दिया। शोक में डूबे राजा प्राण त्यागने चले तो ब्रह्मा की मानसपुत्री देवसेना — जो षष्ठी देवी कहलाईं — प्रकट हुईं। उनके स्पर्श से शिशु जी उठा। राजा ने पृथ्वी पर उनकी पूजा फैलाने का वचन दिया। तभी से छठी मईया संतान की रक्षक मानी जाती हैं।

इतिहास की नज़र से

'छठ' शब्द षष्ठी का ही रूप है। यह फसल कटने के बाद का पर्व भी है — नई उपज के लिए सूर्य के प्रति कृतज्ञता। सूर्य-उपासना की जड़ें वेदों तक जाती हैं; कथाओं में कौन पहला था, इसका कोई एक उत्तर नहीं है।

चार दिन, चार पड़ाव — 2026

शुद्धता, संयम और अगाध आस्था का चार दिवसीय अनुष्ठान

नहाय-खाय

शुक्रवार 13 नवंबर 2026 · चतुर्थी

पवित्र स्नान, घर और रसोई की सफ़ाई। दिन में एक बार सात्विक भोजन — प्रायः लौकी-भात और चने की दाल, बिना प्याज़-लहसुन, सेंधा नमक के साथ।

खरना (लोहंडा)

शनिवार 14 नवंबर 2026 · पंचमी

दिनभर उपवास। सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद पहले अर्पित किया जाता है, फिर ग्रहण। इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।

संध्या अर्घ्य

रविवार 15 नवंबर 2026 · षष्ठी

सूप और दौरे में ठेकुआ, फल, गन्ना और नारियल सजाए जाते हैं। घाट पर जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है; लोकगीतों की गूँज से घाट जगमगाते हैं।

उषा अर्घ्य और पारण

सोमवार 16 नवंबर 2026 · सप्तमी

भोर से पहले घाट पर पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य। इसके बाद पारण — व्रत खोलना — और प्रसाद बाँटना।

छठ क्यों?

इस महापर्व के छह आध्यात्मिक व सामाजिक स्तंभ

१. कृतज्ञता

सूर्य जीवन और ऊर्जा के स्रोत हैं, इसलिए उन्हें 'प्रत्यक्ष देवता' कहा गया। छठ उसी के प्रति धन्यवाद है।

२. संतान की रक्षा

छठी मईया बच्चों की रक्षक और दीर्घायु देने वाली मानी जाती हैं।

३. शुद्धता और संयम

सात्विक भोजन, कठोर उपवास, स्वच्छता — तन और मन की शुद्धि का व्रत।

४. प्रकृति के साथ

बाँस का सूप-दौरा, मिट्टी के दीये और चूल्हा, मौसमी फल और गन्ना — सब प्रकृति से; फसल की पहली उपज का धन्यवाद भी।

५. सबके लिए बराबरी

घाट पर सब साथ खड़े होते हैं; पुरोहित या मंदिर की अनिवार्यता नहीं मानी जाती।

६. अंत का भी सम्मान

डूबते सूर्य को अर्घ्य याद दिलाता है कि हर अस्त के बाद उदय है।

निर्जला व्रत शारीरिक रूप से कठिन है। अपने परिवार की परंपरा और स्वास्थ्य का ध्यान रखें; असहज लगे तो डॉक्टर से सलाह लें।

सामग्री-सूची

सूची हर घर की परंपरा के अनुसार बदलती है — इसे अपने हिसाब से चुनें।

नहाय-खाय सामग्री

खरना सामग्री

अर्घ्य व दौरा सामग्री

ठेकुआ — गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनी, साँचे में ढली, तली हुई मिठाई; छठ का प्रमुख प्रसाद।

बिहार बुला रहा है — घर चलें?

ऑफ़िस, हॉस्टल, दूसरे शहर या विदेश में हैं और इस बार घर नहीं पहुँच पा रहे? छठ आपके साथ चलता है। नदी न हो तो साफ़ टब, बगीचे का पोखर या समाज का बनाया कृत्रिम तालाब भी चलता है — अर्घ्य की श्रद्धा, जल की मात्रा से बड़ी है। अपने शहर के सही सूर्यास्त और सूर्योदय का समय देखें, सामग्री (आटा, गुड़, गन्ना, नारियल, बाँस का दौरा) पहले से जुटा लें — त्योहार के आसपास कई जगह जल्दी खत्म हो सकती है — और जल में खड़े होते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।

छठ गीत सुनिए — घाट तक आवाज़ पहुँचेगी

गीत और स्वर

छठ की सुबह-शाम इन आवाज़ों के बिना अधूरी है।

शारदा सिन्हा

(1952–2024)

'बिहार कोकिला'; मैथिली और भोजपुरी लोकगायिका। पद्म श्री (1991), पद्म भूषण (2018), पद्म विभूषण (2025, मरणोपरांत)।

प्रमुख छठ गीत:
पहिले पहिल छठी मईया केलवा के पात पर हो दीनानाथ उठाउ सुरुज भइले बिहान

अनुराधा पौडवाल

भारतीय पार्श्वगायिका, जिनके स्वर में छठ के पारंपरिक गीत घर-घर गूँजते हैं।

प्रमुख छठ गीत:
उगऽ हो सूरज देव काँच ही बाँस के बहँगिया मारबो रे सुगवा धनुख से

पवन सिंह

भोजपुरी संगीत के लोकप्रिय गायक, जिनके भक्तिभाव से ओतप्रोत छठ गीत करोड़ों श्रद्धालु सुनते हैं।

प्रमुख छठ गीत:
जोड़े जोड़े फलवा (जल बीच खड़ा होई) केरवा के पातवा पे नेवता

खेसारी लाल यादव

भोजपुरी लोकगायक, जिनके पारंपरिक और आधुनिक छठ गीत हर घाट पर बजते हैं।

प्रमुख छठ गीत:
आरा पिया (with पुनीता प्रिया)

कल्पना पटोवारी

असमिया व भोजपुरी लोकगायिका, जिन्होंने भिखारी ठाकुर की परंपरा और छठ गीतों को नई ऊँचाई दी।

प्रमुख छठ गीत:
उगा है सूरज देव

अक्षरा सिंह

प्रसिद्ध गायिका व अभिनेत्री, जिनका छठ पर्व पर बहँगिया का भावपूर्ण गायन अत्यंत प्रिय है।

प्रमुख छठ गीत:
काँच ही बाँस के बहँगिया (उनका संस्करण)

नीलकमल सिंह और प्रियंका सिंह

युवा पीढ़ी के चहेते स्वर, जिन्होंने कोशी भराई और घाट के उल्लास को गीतों में पिरोया।

प्रमुख छठ गीत:
कोशिया भराये लागल

देवी

भोजपुरी लोकगायिका, जिनकी पारंपरिक धुनें और छठी मईया की वंदना घाटों की पहचान हैं।

प्रमुख छठ गीत:
दीही दरसन सुरुज गोसइयाँ
सभी छठ गीत प्लेयर पर सुनें →

शास्त्र-झरोखा

वेदों और पुराणों में सूर्य और षष्ठी देवी की स्तुति

छठ मूलतः लोकपर्व है — परंपरा में इसके लिए पुरोहित या मंत्र-पाठ अनिवार्य नहीं माना जाता। नीचे के श्लोक सूर्य और षष्ठी देवी की शास्त्रीय परंपरा की झलक हैं, कोई अनिवार्य विधि नहीं। अपने परिवार की परंपरा ही सर्वोपरि है।
ऋग्वेद 1.115.1 (सूर्य सूक्त) सूर्य आत्मा जगतः

"सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च" — सूर्य ही सबकी आत्मा

चित्रं देवानामुदगादनीकं चक्षुर्मित्रस्य वरुणस्याग्नेः ।
आप्रा द्यावापृथिवी अन्तरिक्षं सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च ॥
citraṃ devānām ud agād anīkaṃ cakṣur mitrasya varuṇasyāgneḥ | āprā dyāvāpṛthivī antarikṣaṃ sūrya ātmā jagatas tasthuṣaś ca ||
ऋग्वेद 1.35.2 सूर्यास्त-सूर्योदय प्रार्थना

सूर्यास्त-सूर्योदय की प्रार्थना के लिए परंपरागत अर्घ्य-मंत्रों में गिना जाता है

आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च ।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् ॥
ā kṛṣṇena rajasā vartamāno niveśayann amṛtaṃ martyaṃ ca | hiraṇyayena savitā rathenā devo yāti bhuvanāni paśyan ||
गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3.62.10) सविता वंदना
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
oṃ bhūr bhuvaḥ svaḥ | tat savitur vareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi | dhiyo yo naḥ pracodayāt ||
पारंपरिक सूर्य अर्घ्य मंत्र (कर्मकांड परंपरा) अर्घ्य समर्पण
ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते ।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥
oṃ ehi sūrya sahasrāṃśo tejorāśe jagatpate | anukampaya māṃ bhaktyā gṛhāṇārghyaṃ divākara ||

कुछ पाठों में 'मां भक्त्या' की जगह 'मां देव' मिलता है।

आदित्यहृदयम्, श्लोक 6 (वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड) श्रीराम को अगस्त्य उपदेश
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् ।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥
raśmimantaṃ samudyantaṃ devāsuranamaskṛtam | pūjayasva vivasvantaṃ bhāskaraṃ bhuvaneśvaram ||
षष्ठी देवी (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड 43) छठी मईया स्तुति

लोकभाषा में यही षष्ठी देवी 'छठी मईया' हैं

षष्ठांशा प्रकृतेर्या च सा च षष्ठी प्रकीर्तिता ।
बालकाधिष्ठातृदेवी विष्णुमाया च बालदा ॥
आयुःप्रदा च बालानां धात्री रक्षणकारिणी ।
सततं शिशुपार्श्वस्था योगेन सिद्धियोगिनी ॥
ṣaṣṭhāṃśā prakṛter yā ca sā ca ṣaṣṭhī prakīrtitā | bālakādhiṣṭhātṛdevī viṣṇumāyā ca bāladā || āyuḥpradā ca bālānāṃ dhātrī rakṣaṇakāriṇī | satataṃ śiśupārśvasthā yogena siddhiyoginī ||

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

छठ पूजा की तिथि, विधि, इतिहास और नियमों से जुड़े मुख्य प्रश्न

१. छठ पूजा 2026 कब है?
नहाय-खाय 13 नवंबर (शुक्र), खरना 14 नवंबर (शनि), संध्या अर्घ्य 15 नवंबर (रवि) और उषा अर्घ्य 16 नवंबर (सोम) 2026। अपने शहर के सही समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
२. छठ पूजा क्यों मनाई जाती है?
सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता, संतान की रक्षा और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए। कथाएँ प्रियव्रत-मालिनी, कर्ण, द्रौपदी-पांडव और सीता से जुड़ी हैं।
३. छठी मईया कौन हैं?
षष्ठी देवी, जिन्हें ब्रह्मवैवर्त पुराण में प्रकृति का छठा अंश और बालकों की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। कथाओं में उन्हें देवसेना नाम से भी जाना जाता है।
४. छठ पूजा सबसे पहले किसने की?
इसका कोई एक उत्तर नहीं है। अलग-अलग परंपराएँ इसे प्रियव्रत-मालिनी, कर्ण, द्रौपदी-पांडव और सीता से जोड़ती हैं।
५. निर्जला व्रत कितना लंबा होता है?
खरना की शाम के बाद लगभग 36 घंटे, उषा अर्घ्य तक। अपने स्वास्थ्य और परिवार की परंपरा का ध्यान रखें।
६. ठेकुआ क्या है?
गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनी, साँचे में ढली तली हुई मिठाई; छठ का प्रमुख प्रसाद।
७. क्या छठ में मंत्र पढ़ना ज़रूरी है?
छठ लोकपर्व है; परंपरा में पुरोहित या मंत्र-पाठ अनिवार्य नहीं माना जाता। श्लोक शास्त्रीय संदर्भ हैं। अपने परिवार की परंपरा मानें।
८. छठ साल में कितनी बार मनाया जाता है?
दो बार: कार्तिक (अक्टूबर–नवंबर, प्रमुख) और चैत्र (मार्च–अप्रैल, चैती छठ)।
९. नदी न हो तो छठ कैसे करें?
साफ़ टब, बगीचे का पोखर या समाज का कृत्रिम तालाब चल सकता है। अपने शहर के सूर्यास्त-सूर्योदय के समय पर अर्घ्य दें और जल में सुरक्षा का ध्यान रखें।

मंगल कामना व समापन

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥
sarve bhavantu sukhinaḥ sarve santu nirāmayāḥ | sarve bhadrāṇi paśyantu mā kaścid duḥkhabhāg bhavet ||

सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब कल्याण देखें, कोई भी दुःख का भागी न बने।

घाट दूर हो सकता है, आस्था नहीं।