शारदा सिन्हा
(1952–2024)
'बिहार कोकिला'; मैथिली और भोजपुरी लोकगायिका। पद्म श्री (1991), पद्म भूषण (2018), पद्म विभूषण (2025, मरणोपरांत)।
जहाँ डूबते सूरज को भी प्रणाम किया जाता है
छठ सूर्य देव और छठी मईया की उपासना का चार दिवसीय लोकपर्व है। यह कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है — 'छठ' शब्द षष्ठी से ही बना है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई से लेकर देश-विदेश में बसे प्रवासी परिवारों तक, यह आस्था का बड़ा संगम है।
सदियों पुरानी आस्था की अमर गाथाएँ — मान्यता, त्याग और सूर्य-उपासना का संबल।
स्वयंभुव मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत निःसंतान थे। महर्षि कश्यप की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ हुआ, पर रानी मालिनी ने मृत शिशु को जन्म दिया। शोक में डूबे राजा प्राण त्यागने चले तो ब्रह्मा की मानसपुत्री देवसेना — जो षष्ठी देवी कहलाईं — प्रकट हुईं। उनके स्पर्श से शिशु जी उठा। राजा ने पृथ्वी पर उनकी पूजा फैलाने का वचन दिया। तभी से छठी मईया संतान की रक्षक मानी जाती हैं।
महाभारत के अनुसार कर्ण सूर्य देव के पुत्र थे और अंग देश (आज का भागलपुर क्षेत्र) के राजा बने। मान्यता है कि वे जल में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते थे — आज का छठ-अर्घ्य उसी परंपरा की याद दिलाता है।
कथा है कि खोया हुआ राजपाट वापस पाने के लिए द्रौपदी और पांडवों ने छठ व्रत किया। सूर्य की उपासना से उन्हें साहस और तेज मिला।
लोकमान्यता है कि रावण-वध के बाद अयोध्या लौटकर राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य की उपासना का व्रत किया। मुंगेर (बिहार) में लोग मानते हैं कि सीता ने वहीं छठ किया; 'सीता चरण मंदिर' में चरण-चिह्न इसी लोकस्मृति के प्रतीक हैं।
एक पौराणिक कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को सूर्य की आराधना से रोग-मुक्ति मिली। बिहार के सहरसा ज़िले के कंदाहा सूर्य मंदिर की स्थापना का श्रेय परंपरा सांब को देती है।
'छठ' शब्द षष्ठी का ही रूप है। यह फसल कटने के बाद का पर्व भी है — नई उपज के लिए सूर्य के प्रति कृतज्ञता। सूर्य-उपासना की जड़ें वेदों तक जाती हैं; कथाओं में कौन पहला था, इसका कोई एक उत्तर नहीं है।
शुद्धता, संयम और अगाध आस्था का चार दिवसीय अनुष्ठान
पवित्र स्नान, घर और रसोई की सफ़ाई। दिन में एक बार सात्विक भोजन — प्रायः लौकी-भात और चने की दाल, बिना प्याज़-लहसुन, सेंधा नमक के साथ।
दिनभर उपवास। सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद पहले अर्पित किया जाता है, फिर ग्रहण। इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ होता है।
सूप और दौरे में ठेकुआ, फल, गन्ना और नारियल सजाए जाते हैं। घाट पर जल में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है; लोकगीतों की गूँज से घाट जगमगाते हैं।
भोर से पहले घाट पर पहुँचकर उगते सूर्य को अर्घ्य। इसके बाद पारण — व्रत खोलना — और प्रसाद बाँटना।
इस महापर्व के छह आध्यात्मिक व सामाजिक स्तंभ
सूर्य जीवन और ऊर्जा के स्रोत हैं, इसलिए उन्हें 'प्रत्यक्ष देवता' कहा गया। छठ उसी के प्रति धन्यवाद है।
छठी मईया बच्चों की रक्षक और दीर्घायु देने वाली मानी जाती हैं।
सात्विक भोजन, कठोर उपवास, स्वच्छता — तन और मन की शुद्धि का व्रत।
बाँस का सूप-दौरा, मिट्टी के दीये और चूल्हा, मौसमी फल और गन्ना — सब प्रकृति से; फसल की पहली उपज का धन्यवाद भी।
घाट पर सब साथ खड़े होते हैं; पुरोहित या मंदिर की अनिवार्यता नहीं मानी जाती।
डूबते सूर्य को अर्घ्य याद दिलाता है कि हर अस्त के बाद उदय है।
सूची हर घर की परंपरा के अनुसार बदलती है — इसे अपने हिसाब से चुनें।
ऑफ़िस, हॉस्टल, दूसरे शहर या विदेश में हैं और इस बार घर नहीं पहुँच पा रहे? छठ आपके साथ चलता है। नदी न हो तो साफ़ टब, बगीचे का पोखर या समाज का बनाया कृत्रिम तालाब भी चलता है — अर्घ्य की श्रद्धा, जल की मात्रा से बड़ी है। अपने शहर के सही सूर्यास्त और सूर्योदय का समय देखें, सामग्री (आटा, गुड़, गन्ना, नारियल, बाँस का दौरा) पहले से जुटा लें — त्योहार के आसपास कई जगह जल्दी खत्म हो सकती है — और जल में खड़े होते समय सुरक्षा का ध्यान रखें।
छठ गीत सुनिए — घाट तक आवाज़ पहुँचेगीछठ की सुबह-शाम इन आवाज़ों के बिना अधूरी है।
(1952–2024)
'बिहार कोकिला'; मैथिली और भोजपुरी लोकगायिका। पद्म श्री (1991), पद्म भूषण (2018), पद्म विभूषण (2025, मरणोपरांत)।
भारतीय पार्श्वगायिका, जिनके स्वर में छठ के पारंपरिक गीत घर-घर गूँजते हैं।
भोजपुरी संगीत के लोकप्रिय गायक, जिनके भक्तिभाव से ओतप्रोत छठ गीत करोड़ों श्रद्धालु सुनते हैं।
भोजपुरी लोकगायक, जिनके पारंपरिक और आधुनिक छठ गीत हर घाट पर बजते हैं।
असमिया व भोजपुरी लोकगायिका, जिन्होंने भिखारी ठाकुर की परंपरा और छठ गीतों को नई ऊँचाई दी।
प्रसिद्ध गायिका व अभिनेत्री, जिनका छठ पर्व पर बहँगिया का भावपूर्ण गायन अत्यंत प्रिय है।
युवा पीढ़ी के चहेते स्वर, जिन्होंने कोशी भराई और घाट के उल्लास को गीतों में पिरोया।
भोजपुरी लोकगायिका, जिनकी पारंपरिक धुनें और छठी मईया की वंदना घाटों की पहचान हैं।
वेदों और पुराणों में सूर्य और षष्ठी देवी की स्तुति
"सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च" — सूर्य ही सबकी आत्मा
देवताओं की अद्भुत किरण-सेना उदित हुई है — जो मित्र, वरुण और अग्नि की आँख है। सूर्य ने द्युलोक, पृथ्वी और अंतरिक्ष को अपने तेज से भर दिया; वही चर और अचर सम्पूर्ण जगत् की आत्मा हैं।
The wondrous host of rays has risen — the eye of Mitra, Varuna and Agni. The Sun has filled heaven, earth and the space between; he is the soul of all that moves and all that stands still.
सूर्यास्त-सूर्योदय की प्रार्थना के लिए परंपरागत अर्घ्य-मंत्रों में गिना जाता है
सविता देव अंधकारमय अंतरिक्ष से होकर, अमर और मरणशील सबको अपने-अपने कर्म में लगाते हुए, स्वर्णिम रथ पर सभी लोकों को देखते हुए चलते हैं।
Through the dark realm, setting all beings, immortal and mortal, to their tasks, the god Savita travels in his golden chariot, beholding all the worlds.
हम उस सविता देव के वरेण्य तेज का ध्यान करते हैं; वे हमारी बुद्धियों को सही दिशा में प्रेरित करें।
We meditate on the adorable radiance of the divine Savita; may he inspire our minds.
कुछ पाठों में 'मां भक्त्या' की जगह 'मां देव' मिलता है।
हे सहस्र किरणों वाले, तेज के पुंज, जगत् के स्वामी सूर्य! आइए, भक्ति से मुझ पर कृपा कीजिए और हे दिवाकर, मेरा अर्घ्य स्वीकार कीजिए।
O Sun of a thousand rays, mass of radiance, lord of the world — come, be gracious to me in my devotion, and accept my arghya, O maker of the day.
किरणों से सुशोभित, नित्य उदय होने वाले, देवताओं और असुरों द्वारा नमस्कृत, विवस्वान, भास्कर और भुवनेश्वर सूर्य की पूजा करो।
Worship Surya — radiant with rays, ever rising, saluted by gods and demons alike, the shining one, lord of the worlds.
लोकभाषा में यही षष्ठी देवी 'छठी मईया' हैं
जो प्रकृति का छठा अंश हैं, वे षष्ठी कहलाती हैं — बालकों की अधिष्ठात्री देवी, विष्णुमाया, संतान देने वाली, बालकों को आयु देने वाली, उनका पालन और रक्षा करने वाली, योग से सिद्ध योगिनी, जो सदा शिशु के पास रहती हैं।
She who is the sixth part of Prakriti is known as Shashthi — presiding goddess of children, Vishnumaya, bestower of children and long life, nurse and protector, a perfected yogini who ever stays beside the child.
छठ पूजा की तिथि, विधि, इतिहास और नियमों से जुड़े मुख्य प्रश्न
सब सुखी हों, सब निरोगी हों, सब कल्याण देखें, कोई भी दुःख का भागी न बने।
घाट दूर हो सकता है, आस्था नहीं।