शारदा सिन्हा के अमर छठ गीत (Legendary Sharda Sinha Chhath Geet)
पद्म भूषण और पद्म श्री से सम्मानित बिहार कोकिला स्वर्गीय शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) केवल एक गायिका नहीं, बल्कि छठ महापर्व की पहचान हैं। बिहार, झारखंड, पूर्वांचल और दुनिया के किसी भी कोने में छठ का कोई भी घाट या घर उनकी आवाज के बिना अधूरा है। उनकी खनकदार, गहरी और ममतामयी आवाज में गाए गए छठ गीत सीधे आत्मा को छूते हैं।
'पहिले पहिल छठी मईया' – लोक आस्था का अमर गान
शारदा सिन्हा जी का गाया 'पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहार' हर नई पीढ़ी के लिए छठ का संकल्प गीत बन चुका है। इसके अतिरिक्त 'केलवा के पात पर उगेलन सुरुज देव', 'कांच ही बांस के बहंगिया' और 'सुरुज देव अरघ के बेरा' जैसे गीतों ने छठ महापर्व को विश्व पटल पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया।
प्लेलिस्ट में सम्मिलित शारदा सिन्हा जी के गीत
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पहिले पहिल छठी मईया (Pahile Pahil Chhathi Maiya) स्वर: शारदा सिन्हा – संगीत: पारंपरिक
एक युग का अवसान, लेकिन अमर स्वर
शारदा सिन्हा जी भले ही हमारे बीच सशरीर उपस्थित न हों, लेकिन जब भी कार्तिक की हवा में ठंडक घुलेगी और गंगा घाटों पर दीये जलेंगे, उनकी आवाज हर घाट, हर सूप और हर व्रती के दिल में हमेशा अमर रहेगी।
