संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य) के लोकप्रिय छठ गीत (Sandhya Arghya Geet)
कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ महापर्व का सबसे भव्य दिन यानी संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य) मनाया जाता है। वर्ष 2026 में संध्या अर्घ्य 15 नवंबर 2026 (रविवार) को है। इस दिन दोपहर के बाद से ही सिर पर बांस का दउरा (डलिया) उठाए, नंगे पांव नदी, तालाब और जलाशयों की ओर व्रतियों का कारवां निकल पड़ता है। सुनिए गंगा घाटों पर गूंजने वाले सबसे भावुक और ऊर्जावान भोजपुरी छठ गीत।
दउरा-सूप और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य की अलौकिक परंपरा
संध्या अर्घ्य के समय सूप में ठेकुआ, कसार, नारियल, सुथनी, अदरक का पौधा, केला और मौसमी फल सजाए जाते हैं। व्रती परिवार सहित कमर तक पानी में उतरकर पश्चिम दिशा की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही सूर्य देव अस्ताचल की ओर बढ़ते हैं, दूध और जल से सूर्य देव को अर्घ्य समर्पित किया जाता है। यह दृश्य प्रकृति और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता की पराकाष्ठा है।
घाट की शोभायात्रा में गूंजने वाले अमर गीत
जब घर से घाट तक लाखों लोग एक साथ चलते हैं, तो हवा में केवल छठी मईया के जयकारे और ये पावन धुनें गूंजती हैं:
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जल बीच खड़ा होई (Jal Beech Khada Hoee) स्वर: पवन सिंह – जल में खड़े होकर सूर्य प्रार्थना का भावुक भजन
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गोदिया में होईहे बालकवा (Godiya Me Hoihe Balakawa) स्वर: पवन सिंह – संतान सुख और छठी मईया की कृपा का गीत
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जय छठी मईया (Jai Chhathi Maiya) स्वर: पवन सिंह, सोनू निगम, खुशबू जैन – घाट का महागीत
कोसी भरने (कोशिया) की रात्रि परंपरा
संध्या अर्घ्य के बाद घर लौटकर व्रती आंगन में मिट्टी के हाथियों और दीयों से 'कोसी' भरते हैं। रात भर छठी मईया के जागरण गीत गाए जाते हैं, जिसमें परिवार और रिश्तेदार मिलकर भजनों का आनंद लेते हैं और आने वाले भोर (उषा अर्घ्य) की प्रतीक्षा करते हैं।
