नहाय-खाय के पारंपरिक छठ गीत 2026 (Nahay Khay Chhath Geet)
चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय-खाय (Nahay Khay) के पावन संकल्प के साथ होती है। वर्ष 2026 में नहाय-खाय 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है। इस दिन घर-आंगन की गहन साफ-सफाई के बाद व्रती पवित्र गंगा अथवा स्थानीय जलाशय में स्नान कर शुद्ध घी और सेंधा नमक में बने अरवा चावल और कद्दू (लौकी) की सब्जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। सुनिए इस पावन दिन के सबसे सुंदर भक्तिमय गीत।
नहाय-खाय की पारंपरिक विधि और कद्दू-भात का महत्व
नहाय-खाय के दिन पूरे घर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र किया जाता है। भोजन में पीतल या मिट्टी के नए बर्तनों का प्रयोग होता है और आम की लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाया जाता है। कद्दू (लौकी) को आयुर्वेद और सनातन परंपरा में अत्यंत सात्विक, शीतल और सुपाच्य माना गया है, जो आगे आने वाले 36 घंटे के निर्जला व्रत के लिए व्रती के शरीर को तैयार करता है।
नहाय-खाय के समय गाए जाने वाले प्रमुख छठ गीत
इस पावन दिन सुबह से ही घर की महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं। हमारी प्लेलिस्ट में नहाय-खाय के अवसर पर सबसे अधिक सुने जाने वाले गाने शामिल हैं:
-
पहिले पहिल छठी मईया (Pahile Pahil Chhathi Maiya) स्वर: शारदा सिन्हा – नहाय-खाय की शुरुआत का अमर गीत
-
केरवा के पतवा पे नेवता पेठवनी (Kerawa Ke Patawa) स्वर: पवन सिंह – सूर्य देव को प्रथम निमंत्रण
-
छठ करब हम जरूर (Chath Karab Hum Jaroor) स्वर: स्वाति मिश्रा – व्रत का पावन संकल्प
नहाय-खाय से जुड़े मुख्य नियम व सावधानियां
1. भोजन में लहसुन और प्याज का पूर्ण त्याग किया जाता है।
2. व्रती के भोजन ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य सदस्य प्रसाद के रूप में कद्दू-भात ग्रहण करते हैं।
3. इस दिन से घर में पूर्ण ब्रह्मचर्य और सात्विकता का पालन अनिवार्य होता है।
